Chhattisgarh BJP Controversy: 23 MLAs Excluded from State Working Committee Meeting

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Chhattisgarh BJP Controversy: 23 MLAs Excluded from State Working Committee Meeting
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रायपुर:छत्तीसगढ़ की राजनीति में भाजपा संगठन के भीतर हुए हालिया बदलावों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक में 23 विधायकों को सदस्य न बनाए जाने के फैसले ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहला मौका माना जा रहा है जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रदेश कार्यसमिति जैसी महत्वपूर्ण संगठनात्मक संरचना से इस स्तर पर बाहर रखा गया हो। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सामान्य परंपरा में सभी विधायक और सांसदों को प्रदेश कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में स्थान दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार बनी नई टीम में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां कुल 54 विधायकों में से केवल 14 मंत्रियों और 17 विधायकों को ही जगह मिली, जबकि शेष 23 विधायक बाहर रह गए।इनमें सुशांत शुक्ला, भैयालाल राजवाड़े, अनुज शर्मा, ललित चंद्राकर, धर्मजीत सिंह, ईश्वर साहू और प्रबोध मिंज जैसे नाम शामिल हैं। बैठक के दौरान यह मुद्दा खुलकर सामने आया और संगठनात्मक असंतुलन की चर्चा पूरे राजनीतिक गलियारों में फैल गई। इसी बीच यह भी चर्चा में रहा कि बैठक में महापौर, जिला प्रभारी और निगम-मंडल अध्यक्षों की उपस्थिति के बावजूद बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति संगठन के भीतर बढ़ती दूरी को दर्शाती है।संगठनात्मक बदलावों के बीच प्रभारी को लेकर अनिश्चितताभाजपा के भीतर चल रहे पुनर्गठन के बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि जून तक छत्तीसगढ़ को नया प्रभारी मिलने की संभावना है। वर्तमान राष्ट्रीय नेतृत्व संरचना में बदलाव के चलते यह प्रक्रिया लंबित है।और ये भी पढ़ेबीजेपी संगठन में अंदरूनी हलचल तेज! नई कार्यसमिति से कई बड़े चेहरों की छुट्टी तय? क्षेत्र और...भाजपा में बड़ा फेरबदल? सत्ता-संगठन में बदलाव की अटकलें तेज, महिला डिप्टी सीएम की एंट्री के चर्चेभाजपा प्रदेश कार्यसमिति में बड़ा बदलाव की तैयारी! अब केवल 106 सदस्य, 75% नए चेहरों को मौकाकोर कमेटी में भी बड़ा फेरबदलहाल ही में हुई कोर कमेटी बैठक में भी व्यापक बदलाव देखने को मिला। कई वरिष्ठ नेताओं को बाहर कर नई टीम में ओ.पी. चौधरी, विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा जैसे चेहरों को शामिल किया गया है। इस बदलाव को संगठन में “नई पीढ़ी और नई रणनीति” के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।सवालों के घेरे में संगठनात्मक संदेशइसी बीच यह भी चर्चा तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सादगी और काफिले कम करने के आह्वान के बावजूद बैठक में बड़ी संख्या में वाहनों का उपयोग हुआ। इसे लेकर भी संगठनात्मक अनुशासन और संदेश की गंभीरता पर सवाल उठे हैं।

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