Iranian Drone Strike at Kuwait International Airport Kills One, Injures Many

Dainik Bhaskar
Iranian Drone Strike at Kuwait International Airport Kills One, Injures Many
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कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 63 लोग घायल हैं। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर है। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना पर शोक जताया है। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कई लोगों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद 25 एम्बुलेंस मौके पर भेजी गईं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हमले से एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए एयरपोर्ट ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे पहले अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया था कि ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैनिकों पर फिर ड्रोन हमले किए। हालांकि, सारे हमले नाकाम हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने माना है कि उन्होंने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर बातचीत के दौरान उन्हें ‘*** पागल’ कहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह नेतन्याहू की इज्जत करते हैं और उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं। एक पॉडकास्ट में ट्रम्प ने कहा- नेतन्याहू के खिलाफ ट्रम्प की गाली-गलौज वाली खबर सबसे पहले एक्सियोस ने सोमवार को पब्लिश की थी। बाद में इजराइली अधिकारियों ने इस रिपोर्ट का खंडन किया था। ईरान के हमले में कुवैत में कम से कम 63 लोग घायल हुए हैं। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार घायलों में एयरपोर्ट के कर्मचारी और यात्री भी शामिल हैं। हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं कुवैत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई है। हमले के बाद कुछ समय के लिए हवाई अड्डे का संचालन प्रभावित हुआ, हालांकि सुरक्षा जांच के बाद सीमित उड़ान सेवाएं फिर शुरू कर दी गईं। ट्रम्प ने पॉडकास्ट में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का जिक्र किया और कहा कि युद्ध तथा तनाव के बावजूद शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा- ट्रम्प ने कहा है कि ईरान में अमेरिकी सेना के जमीनी अभियान की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पिछले कई महीनों से चल रहे हवाई हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचाया है। न्यूयॉर्क पोस्ट के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हमें अब जमीनी सैनिकों की जरूरत नहीं है। हमने सिर्फ बमबारी के जरिए उनकी सेना के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया। हमने वहां कोई सैनिक नहीं भेजा।” ट्रम्प ने आगे कहा कि अगर जमीनी सेना भेजने से बचा जा सकता है तो ऐसा ही करना बेहतर होता है, क्योंकि यह कम जोखिम भरा विकल्प है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने पर पहले ही सहमति जता दी है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा, "हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते। और वे पहले ही इस बात पर सहमत हो चुके हैं कि उनके पास यह नहीं होगा।" ट्रम्प ने इसे बातचीत का सबसे बड़ा और सबसे अहम मुद्दा बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि भविष्य में ईरान अपना फैसला बदल सकता है, लेकिन फिलहाल उसने इस शर्त को मान लिया है।" हालांकि ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान ने किस रूप में या किस दस्तावेज के तहत परमाणु हथियार न बनाने की सहमति दी है। वहीं व्हाइट हाउस ने उन रिपोर्टों की पुष्टि की है जिनके अनुसार दोनों पक्षों के बीच जिस समझौता ज्ञापन (MOU) पर चर्चा चल रही है, उसके तहत ईरान औपचारिक रूप से यह शपथ लेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। युद्ध का असर तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ट्रम्प सरकार अब तक अमेरिका के इमरजेंसी तेल भंडार से करीब 5.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल जारी कर चुकी है। यह कुल रणनीतिक भंडार का लगभग 14% है। कच्चा तेल रिलीज करने का मकसद ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई आपूर्ति की समस्या को कम करना है। अमेरिका के पास लुइसियाना और टेक्सास की भूमिगत गुफाओं में अधिकतम 71.4 करोड़ बैरल तेल रखने की क्षमता है। मार्च 2026 में संकट शुरू होने से पहले इसमें करीब 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जो अब घटकर 35.71 करोड़ बैरल रह गया है। यह जनवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। कैलिफोर्निया में मैराथन पेट्रोलियम की रिफाइनरी में बने तेल भंडारण टैंक। अमेरिका अपने इस रिजर्व को लंबे समय तक खाली नहीं रख सकता, क्योंकि यह नेशनल सिक्योरिटी का मामला है। संकट टलने के बाद ट्रम्प सरकार को बाजार से दोबारा महंगा तेल खरीदकर इस खजाने को भरना होगा, जिससे अमेरिकी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। दरअसल, तेल जारी करने का यह सिर्फ अमेरिका का फैसला नहीं है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने का सामूहिक फैसला किया। यह इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी ऑयल रिलीज है। अमेरिका जो तेल जारी कर रहा है, वह इसी वैश्विक डील का हिस्सा है। आमतौर पर इतने बड़े युद्ध और सप्लाई रुकने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं, लेकिन इस कदम की वजह से कीमतें नियंत्रण से बाहर नहीं गईं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक टेंपरेरी बफर (अस्थायी राहत) है। यदि जून के आखिर तक यह समुद्री रास्ता नहीं खुला, तो तेल की कीमतें तेजी से भाग सकती हैं। ईरान के एक सीनियर नेता ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान बातचीत या युद्धविराम के दौरान किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं करेगा। रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने कहा कि अगर ईरान पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब मिसाइलों और ड्रोन से दिया जाएगा। उन्होंने कहा, हमारे खिलाफ होने वाले हर हमले का जवाब दिया जाएगा। जो भी हमला करेगा, उसे जल्द इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। मोहसिन रजाई ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका को बातचीत या युद्धविराम की प्रक्रिया में अपनी शर्तें थोपने नहीं देगा। कुवैत ने कहा है कि ईरान के एक हमले में देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हमले के बाद कुवैत ने सभी वाणिज्यिक उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने अमेरिका के हालिया हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि ये युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुवैत और बहरीन इन हमलों के लिए "सीधे और साफ तौर पर जिम्मेदार" हैं, क्योंकि उनके इलाके और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन में किया गया। तेहरान ने कहा कि उसे आत्मरक्षा का अधिकार है और भविष्य में किसी भी हमले के स्रोत को निशाना बनाने समेत हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर मोजतबा निकजाद ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईरान बातचीत करेगा, लेकिन अमेरिका के किसी वादे पर भरोसा नहीं करता। उन्होंने विदेशी मीडिया की उन रिपोर्ट्स को भी खारिज किया, जिनमें ईरान में युद्ध और भूख जैसी स्थिति का दावा किया गया था। उनके मुताबिक, संघर्ष के दौरान 70 लाख लोग विस्थापित हुए थे लेकिन सरकार ने खाने, रोटी और रहने की व्यवस्था संभाल ली थी। अल जजीरा के मुताबिक, निकजाद ने अमेरिका पर क्रूर अपराध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मिसाइल हमलों में दो परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। कुवैत के एक सैन्य अधिकारी ने देश पर हुए ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में कई लोग घायल हुए और इंटरनेशनल एयरपोर्ट बंद करना पड़ा। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने कहा कि हमलों से एयरपोर्ट की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हुए हैं। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने लोग घायल हुए और उनकी हालत कितनी गंभीर है। बहरीन की सेना ने कहा है कि उसने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाकर दागी गई 3 मिसाइलों और कई ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सेना ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे "लगातार आक्रामक कार्रवाई" बताया। बहरीन की सेना ने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और देश की सुरक्षा के लिए उसकी सेना पूरी तरह तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस, तुर्किये, कतर, मिस्र, पाकिस्तान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से फोन पर बातचीत की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ हुई बातचीत में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी शामिल थे। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ ड्रोन और मिसाइल हमले किए। तेहरान का कहना है कि ये हमले अमेरिकी आक्रामकता के जवाब में किए गए। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में किए गए उसके जवाबी हमले अमेरिका के लिए सबक होने चाहिए। IRGC के बयान के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने देर रात होर्मुज स्ट्रेट के पास एक ईरानी तेल टैंकर पर हवाई हमला किया, जिससे जहाज के इंजन रूम को नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में IRGC ने दावा किया कि उसने "पनाया" नाम के एक अमेरिकी-जियोनिस्ट जहाज को मिसाइलों से निशाना बनाया। IRGC ने कहा, “हम पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी सेना को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा बिगाड़ने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” वहीं ईरान के कट्टरपंथी सांसद इस्माइल कौसरी ने कहा कि ईरानी सेना को अमेरिका के खिलाफ कहीं ज्यादा मजबूत जवाब देना चाहिए। अल जजीरा के मुताबिक, कौसरी ने कहा कि अमेरिकी सिर्फ ताकत और शक्ति की भाषा समझते हैं। कुवैत की सेना ने कहा है कि कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक टर्मिनल पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हो गए। कुवैत न्यूज एजेंसी के मुताबिक, घायलों का इलाज जारी है। जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि एयरपोर्ट पर उड़ानें फिलहाल रोक दी गई हैं। अगली सूचना तक फ्लाइट्स को दूसरे एयरपोर्ट्स की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। भारत में ईरान के दूतावास ने एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और एयर व हेलिकॉप्टर बेस पर ईरानी हमला कानूनी आत्मरक्षा में किया गया जवाब था। हालांकि, इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पर पोस्ट कर ईरान के अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर हमले को खारिज किया था। ईरान का केश्म आइलैंड करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला, खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा द्वीप है। यह आइलैंड कभी फ्री-ट्रेड जोन और टूरिस्ट जगह के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह एक बड़े सैन्य ठिकाने में बदल चुका है। होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर मौजूद यह द्वीप रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। अमेरिका इसे कई वजहों से बड़ा सैन्य खतरा मानता है। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने इजराइल को दी जा रही अमेरिकी आर्थिक मदद की आलोचना की है। उन्होंने ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच तनाव की खबरों को भी सिर्फ बातें बताया। मैसी ने ट्रम्प सरकार की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "अगर अमेरिका एक महीने के लिए इजराइल की विदेशी मदद रोक दे, तो वह अपने पड़ोसियों पर बमबारी बंद कर देगा। तुरंत शांति हो जाएगी, होर्मुज स्ट्रेट खुल जाएगा और पेट्रोल 2 डॉलर प्रति गैलन सस्ता हो जाएगा।" उन्होंने आगे कहा, "इजराइल अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों से सबसे ज्यादा फायदा पाने वाला देश रहा है और अब भी है।" वर्ल्ड फूड प्रोग्राम यानी WFP ने बताया की गाजा के करीब 6 लाख फिलिस्तीनी परिवारों की निजी जानकारी एक साइबर हमले में लीक हो गई है। यह डेटा उस सेल्फ-रजिस्ट्रेशन ऐप से जुड़ा था, जिसके जरिए लोग खाद्य और नकद सहायता पाने के लिए आवेदन करते थे। WFP ने कहा कि लीक हुई निजी जानकारी में नाम, पहचान पत्र नंबर, मोबाइल नंबर और लोकेशन डेटा शामिल हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में 1% से ज्यादा तेजी आई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.05 डॉलर यानी 1.09% बढ़कर 97.05 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 1.01 डॉलर यानी 1.08% चढ़कर 94.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना के आगे बढ़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन UNIFIL की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पिछले हफ्ते इजराइली सैनिक लेबनान के अंदर पहले से ज्यादा आगे तक पहुंच गए। इसके बाद कई लोगों ने पूछा कि अगर UNIFIL का काम शांति बनाए रखना है, तो वह इजराइली सेना को आगे बढ़ने से क्यों नहीं रोक सका। लेबनान में इजराइली हमले बढ़ने से UN की संस्था पर सवाल उठे UNIFIL संयुक्त राष्ट्र का एक शांति मिशन है, जिसे दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम की निगरानी और शांति बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है। लेकिन लंबे समय से इस मिशन को दोनों पक्षों की आलोचना झेलनी पड़ रही है। इजराइल का आरोप है कि UNIFIL हिजबुल्लाह की सैन्य गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहा है। वहीं हिजबुल्लाह और उसके समर्थकों का कहना है कि UNIFIL की कुछ गतिविधियां इजराइल के हितों के मुताबिक काम करती हैं। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी बलों पर फिर ड्रोन हमले किए। हालांकि, सारे हमले नाकाम हो गए। CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन को मार गिराया और किसी अमेरिकी सैनिक या सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं हुआ। हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना पर 13 हमले किए। संगठन के मुताबिक, इन हमलों में सैनिक जमावड़ों, सैन्य वाहनों और कमांड पोस्ट को निशाना बनाया गया। हिजबुल्लाह ने बयान में कहा कि उसके लड़ाकों ने रॉकेट, आर्टिलरी, गाइडेड मिसाइल और अटैक ड्रोन का इस्तेमाल कर इजराइली सेना की आगे बढ़ने की कोशिशों को रोका। संगठन के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में दोनों पक्षों के बीच भारी संघर्ष हुआ, जहां इजराइली सेना ने घुसपैठ बढ़ाई है। हद्दाथा और अल-बलू इलाके में हिजबुल्लाह ने कई इजराइली मर्कावा टैंकों को निशाना बनाने और एक सैन्य वाहन के पास विस्फोटक डिवाइस उड़ाने का दावा किया। संगठन का कहना है कि इसके बाद इजराइली सैनिकों को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी और एयर स्ट्राइक के सहारे पीछे हटना पड़ा। बयान में यह भी कहा गया कि दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कैसल और बिय्यादा कस्बे के आसपास तैनात इजराइली बलों पर भी मिसाइल और रॉकेट हमले किए गए। हिजबुल्लाह के मुताबिक, इन हमलों में एक कमांड मुख्यालय और बख्तरबंद यूनिट्स को निशाना बनाया गया। ट्रम्प ने सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी। गालीगलौज भी की। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में नेतन्याहू को पागल कह दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान पर हमले के बाद ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर इजराइली कार्रवाई जारी रही तो वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत छोड़ सकता है। इससे नाराज ट्रम्प ने नेतन्याहू को फोन किया। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में कहा- अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रम्प खास तौर पर इस बात से परेशान थे कि लेबनान में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जा रहे हैं और एक हिजबुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें गिराई जा रही हैं।

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